नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत की चुनावी व्यवस्था और वोटर आइडी प्रणाली की तारीफ किए जाने पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत की चुनावी मशीनरी की विश्वसनीयता और मजबूती वैश्विक स्तर पर पहले से स्थापित तथ्य है। मंत्रालय ने ट्रंप की टिप्पणी पर कोई विशेष राजनीतिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया।
ट्रंप ने अमेरिका में मतदाता पहचान से जुड़े नियमों को सख्त करने की वकालत करते हुए भारत की चुनावी व्यवस्था का उदाहरण दिया था। उन्होंने भारत में मतदाताओं की पहचान के लिए फोटो आइडी के इस्तेमाल का उल्लेख किया। ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का भी संदर्भ दिया और अमेरिकी चुनावों में अनिवार्य मतदाता पहचान की जरूरत पर जोर दिया।
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका में प्रस्तावित SAVE America Act को लेकर चल रही बहस के बीच आई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन से जुड़े नियमों को कड़ा करना है। भारत की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने इसे चुनावी प्रक्रिया में पहचान सुनिश्चित करने का एक उदाहरण बताया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब ट्रंप की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस पर उनकी कोई विशेष टिप्पणी नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की चुनावी मशीनरी की विश्वसनीयता और मजबूती वैश्विक स्तर पर अच्छी तरह स्थापित तथ्य हैं।
भारत में चुनाव आयोग मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के साथ मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र जारी करता है। चुनाव प्रक्रिया में मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है।
ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में चुनावी पहचान और नागरिकता सत्यापन को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। भारत की विशाल चुनाव प्रक्रिया और मतदाता पहचान व्यवस्था का अमेरिकी बहस में उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से भारतीय चुनावी तंत्र को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में एक नया संदर्भ मिला है। वहीं, भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस भी लगातार जारी है।





