बेंगलुरु। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के दौरान आखिरी समय तक चली उठापटक, नेताओं की नाराजगी और सूची में लगातार हुए बदलाव ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया। लंबे इंतजार के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार तो हो गया, लेकिन कई दावेदारों के नाम अंतिम समय में हटने और नए नाम जुड़ने से पूरे घटनाक्रम पर असमंजस की स्थिति बनी रही।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों की सूची को लेकर प्रदेश नेतृत्व और कांग्रेस आलाकमान के बीच देर रात तक मंथन चलता रहा। क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ विभिन्न गुटों को साधने की कोशिश में अंतिम क्षणों तक सूची में संशोधन किए गए। इससे कई विधायक और उनके समर्थक नाराज हो गए।
कैबिनेट में स्थान नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायकों ने खुलकर असंतोष जताया। दो विधायकों ने इस्तीफा देने की घोषणा कर दी, जबकि कई अन्य नेताओं ने भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक की। राज्य के विभिन्न हिस्सों में समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन कर नेतृत्व पर दबाव बनाने का प्रयास किया।
सरकार की ओर से कहा गया कि मंत्रिमंडल गठन में सभी क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों और अनुभवी तथा युवा नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। इसके बावजूद कई वरिष्ठ नेताओं के बाहर रहने से पार्टी के भीतर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
राज्य नेतृत्व ने नाराज नेताओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। वहीं मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पार्टी हित सर्वोपरि रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट नेताओं को साधने और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की होगी।





