बेंगलुरु। कर्नाटक में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य के मंत्री प्रियंक खड़गे के एक बयान पर सियासी घमासान छिड़ गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को लेकर दिए गए उनके बयान को विपक्ष ने असंवेदनशील बताते हुए कड़ी आलोचना की है और माफी की मांग की है।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब पत्रकारों ने भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर मंत्री से सवाल किया। इस पर प्रियंक खड़गे ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी परीक्षा केंद्रों में अव्यवस्था फैलाएंगे और व्यवस्था बाधित करेंगे तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग लंबे समय तक आंदोलन जारी रखेंगे तो पुलिस लाठीचार्ज करेगी और उसके बाद वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया।
भारतीय जनता पार्टी ने मंत्री के बयान को लोकतांत्रिक अधिकारों का अपमान बताते हुए कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में उठे सवालों का जवाब देने के बजाय अभ्यर्थियों को डराने का प्रयास कर रही है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार युवाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और मंत्री को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
वहीं, प्रियंक खड़गे ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी परीक्षा देने वाले लाखों अभ्यर्थियों के हितों और कानून-व्यवस्था की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और केवल एक केंद्र पर सीमित संख्या में लोगों ने व्यवधान उत्पन्न किया, जिसके कारण पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ी।
इस बीच भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और एक परीक्षा केंद्र पर ओएमआर शीट से जुड़े विवाद की जांच भी जारी है। कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर बना हुआ है।





