नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राजस्थान के सिरोही से भाजपा सांसद लुंबाराम चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत वित्तीय सहायता मिली थी। हालांकि, भागीरथ चौधरी ने बाद में मिली सब्सिडी की राशि वापस कर दी।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भागीरथ चौधरी को राजस्थान में खीरे की व्यावसायिक खेती परियोजना के लिए लगभग 99 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई थी। यह सहायता ‘वाणिज्यिक बागवानी विकास योजना’ के तहत दी गई थी, जिसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है।
मामला सामने आने के बाद मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा था कि उन्होंने योजना के सभी नियमों का पालन करते हुए आवेदन किया था। उन्होंने खुद को किसान बताते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं किसानों को आधुनिक खेती अपनाने में मदद करती हैं। बाद में सरकार ने संसद में बताया कि उन्होंने सब्सिडी की राशि वापस कर दी है।
वहीं, राजस्थान के सिरोही से सांसद लुंबाराम चौधरी को भी इसी योजना के तहत सहायता मिली थी। सरकारी जानकारी के मुताबिक, उन्हें वर्ष 2025 में नींबू की खेती से जुड़ी परियोजना के लिए करीब 4.20 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। उनकी परियोजना राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित कृषि भूमि से जुड़ी थी।
सरकार ने स्पष्ट किया कि NHB योजना के तहत सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। इसमें ऑनलाइन आवेदन, परियोजना की जांच और स्वीकृति जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल हैं। योजना का उद्देश्य किसानों को पॉलीहाउस, संरक्षित खेती और आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हुई है। विपक्ष ने मंत्री को मिली सब्सिडी पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और मंत्री पक्ष का कहना है कि सहायता नियमों के तहत स्वीकृत हुई थी और इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई। सब्सिडी लौटाने के फैसले के बाद यह मामला संसद में चर्चा का विषय बना रहा।
NHB की योजनाओं का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना और किसानों को व्यावसायिक बागवानी की ओर आकर्षित करना है। सरकार का कहना है कि ऐसी योजनाओं से खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।





