नई दिल्ली। भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर संदेह व्यक्त किया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि क्या भगवान जगन्नाथ का एनिमेटेड या कार्टून शैली में चित्रण किए जाने से श्रद्धालुओं की आस्था वास्तव में प्रभावित हो सकती है। अदालत की इस टिप्पणी ने मामले को नई दिशा दे दी है।
मामला फिल्म में भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर उठी आपत्तियों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म में धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप प्रस्तुति नहीं की गई है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसी आधार पर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर किसी फिल्म को रोकना उचित नहीं होगा कि उसमें देवी-देवताओं का एनिमेटेड रूप दिखाया गया है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि किसी कलात्मक प्रस्तुति और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
फिल्म के निर्माताओं का पक्ष है कि ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ एक श्रद्धापूर्ण प्रस्तुति है और इसका उद्देश्य भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्ति और संस्कृति का प्रसार करना है। उनका कहना है कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणन प्राप्त है और इसमें किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं है।
इससे पहले ओडिशा सरकार और कुछ याचिकाकर्ताओं ने फिल्म के प्रदर्शन पर आपत्ति जताई थी। मामले में पहले भी अदालत ने रथ यात्रा के दौरान फिल्म की रिलीज को टालने का निर्देश दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रथ यात्रा समाप्त होने के बाद फिल्म के देशभर में प्रदर्शन का मार्ग प्रशस्त किया था।
अब ताजा सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक आस्था और कलात्मक प्रस्तुति के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस के रूप में सामने आया है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत याचिकाओं पर विस्तृत विचार करेगी।





