नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर संसद में सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यह विधेयक लेकर आई है, इसलिए विपक्ष को चर्चा से बचने के बजाय अपने सुझाव रखने चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में इस विधेयक पर लगभग आठ घंटे की चर्चा के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार परीक्षा सुधार के मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है, लेकिन जब संसद में विस्तार से चर्चा का अवसर दिया जा रहा है तो वह इससे बचने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संवाद ही समस्याओं का समाधान है और संसद इसके लिए सबसे उपयुक्त मंच है।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष चर्चा में हिस्सा नहीं भी लेता है, तब भी सरकार विधेयक को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार, देश के करोड़ों छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों से जुड़े इस कानून को लंबित नहीं रखा जा सकता। सरकार की प्राथमिकता परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित संशोधन विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग और संगठित परीक्षा घोटालों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और अधिक प्रभावी बनाना है। हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों और छात्र आंदोलनों के बाद केंद्र सरकार ने कानून को और सख्त बनाने की पहल की है।
विपक्ष परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों के आंदोलनों को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है, जबकि सरकार का कहना है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और संसद में सभी दलों के सुझावों का स्वागत करेगी। अब इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और उसके बाद की संसदीय प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।





