नई दिल्ली। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।
डीएमके का कहना है कि नीट परीक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं और हालिया पेपर लीक विवाद ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था ग्रामीण और राज्य बोर्ड के छात्रों के साथ न्याय नहीं कर पा रही है। ऐसे में केंद्र सरकार को नीट पर तत्काल रोक लगाकर वैकल्पिक और पारदर्शी प्रवेश प्रणाली पर विचार करना चाहिए।
पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा की स्वतंत्र जांच की भी मांग की है। डीएमके का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ यदि बल प्रयोग हुआ है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी मांग की गई है।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी संसद में सरकार को घेरने की तैयारी की है। राज्यसभा में विपक्ष ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग और नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा की मांग करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शी जांच आवश्यक है।
नीट परीक्षा को लेकर देशभर में विरोध की आवाजें लगातार तेज हो रही हैं। विभिन्न छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, पेपर लीक मामलों में त्वरित कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। डीएमके ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों में सरकार को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ निर्णय लेना चाहिए।





