हरिद्वार। वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए हरिद्वार वन विभाग ने नई तकनीक का सहारा लेने की तैयारी की है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंगल से आबादी वाले क्षेत्रों में आने वाले वन्यजीवों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है। इसके तहत संवेदनशील इलाकों में स्मार्ट कैमरे और रियल टाइम अलर्ट सिस्टम लगाए जाएंगे।
वन विभाग के अनुसार, हरिद्वार का श्यामपुर क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व और आबादी वाले इलाकों के बीच स्थित है, जहां हाथी, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। अर्धकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इस क्षेत्र में विशेष निगरानी की योजना बनाई गई है।
योजना के तहत करीब 50 संवेदनशील स्थानों पर सोलर पावर से संचालित एआई कैमरे और नाइट विजन उपकरण लगाए जाने का प्रस्ताव है। ये कैमरे वन्यजीवों की गतिविधियों को पहचानकर नियंत्रण कक्ष को तुरंत सूचना भेजेंगे। इसके बाद फील्ड रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालेगी।
वन विभाग इस व्यवस्था को ‘वर्चुअल वॉल’ के रूप में विकसित कर रहा है, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और उनके आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश को समय रहते रोका जा सकेगा। इसके अलावा जानवरों को भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रखने के लिए अन्य आधुनिक उपायों पर भी काम किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, अर्धकुंभ क्षेत्र के आसपास हाथियों की आवाजाही सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए कुछ हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाने की योजना भी बनाई गई है, जिससे उनकी लोकेशन की रियल टाइम जानकारी मिल सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित दिशा में मोड़ा जा सके।
हरिद्वार वन विभाग का कहना है कि तकनीक आधारित निगरानी से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं, साधु-संतों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी यह व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।
अर्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन और वन्यजीव नियंत्रण के लिए बहुस्तरीय तैयारियां कर रहा है। एआई आधारित निगरानी व्यवस्था इसी व्यापक योजना का हिस्सा है।





