इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान संभावित मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की पहल के बाद इस्लामाबाद ने दोनों देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं।
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान में ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। ईरान के आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान पाकिस्तानी नेतृत्व और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात हुई। यह उनकी कम समय में पाकिस्तान की दूसरी यात्रा बताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संवाद के एक संभावित माध्यम के रूप में पेश कर रहा है। इस्लामाबाद के ईरान और अमेरिका दोनों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं, जिसके चलते वह दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है।
चीन की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम मानी जा रही है। बीजिंग क्षेत्रीय स्थिरता और खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाले तनाव को कम करने में रुचि रखता है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की पहल के बाद पाकिस्तान के माध्यम से कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराना आसान चुनौती नहीं है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद बने हुए हैं। पाकिस्तानी सूत्रों ने भी संकेत दिया है कि वार्ता बहाली के रास्ते में कई बड़ी बाधाएं मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका उसके लिए क्षेत्रीय कूटनीति में प्रभाव बढ़ाने का अवसर हो सकती है। वहीं, उसे सऊदी अरब, चीन, अमेरिका और ईरान जैसे अलग-अलग हित रखने वाले देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
इससे पहले भी पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए संपर्क प्रयासों में भूमिका निभाई है। अब चीन समर्थित नए प्रयासों के बाद इस्लामाबाद की कूटनीतिक सक्रियता पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है।





