केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस पर कृषि अनुसंधान को किसानों की समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए दालों और तिलहनों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आईसीएआर को दीर्घकालिक रोडमैप पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों का शोध तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिले। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, घटते प्राकृतिक संसाधनों और बदलती कृषि चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी तकनीकों के विकास पर बल दिया जो कम लागत में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करें।
केंद्रीय मंत्री ने दाल और तिलहन के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और अनुसंधान आधारित नवाचारों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को तेजी से खेतों तक पहुंचाना समय की मांग है। साथ ही कृषि अनुसंधान को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने और नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
आईसीएआर के स्थापना दिवस समारोह में कृषि अनुसंधान, नवाचार और कृषि विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को और मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।





