पश्चिम बंगाल सरकार ने पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान कथित संस्थागत भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज करते हुए गठित न्यायिक जांच आयोग को जल्द सक्रिय करने का फैसला किया है। आयोग अगस्त के पहले पखवाड़े से अपना काम शुरू करेगा और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ-साथ पुस्तक मेलों में करोड़ों रुपये के कथित गबन सहित कई मामलों की जांच करेगा।
आयोग का दायरा शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति, नगर निकाय, पंचायत, आवास, उद्योग, लोक निर्माण, मत्स्य, भूमि प्रशासन तथा अन्य सरकारी संस्थानों तक रहेगा। इसके अलावा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों और पुस्तक मेलों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की भी विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार आयोग स्वतंत्र रूप से साक्ष्य जुटाएगा और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों व संस्थाओं से दस्तावेज तलब करेगा। जांच के दौरान यदि किसी मामले में आपराधिक कार्रवाई की आवश्यकता महसूस होती है तो आयोग संबंधित पुलिस एजेंसियों को एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी कर सकेगा। साथ ही समय-समय पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।
सरकार का कहना है कि आयोग का उद्देश्य केवल वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा करना ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक सुझाव देना भी है। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं और संस्थानों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, इस कदम को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्माने लगी है और विपक्ष ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर नजर बनाए रखने की बात कही है।





