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पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं  : विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत पासपोर्ट का उद्देश्य भारतीय नागरिकों की विदेश यात्रा को विनियमित करना है, न कि नागरिकता का अंतिम निर्धारण करना।

विदेश मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण हाल के दिनों में पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में लेकर उठे विवाद और सार्वजनिक चर्चा के बीच आया है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल पात्र भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता का निर्धारण संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों एवं कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाता है।

एमईए ने दोहराया कि विदेश यात्रा के दौरान पासपोर्ट धारक की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए यह एक आधिकारिक दस्तावेज है, लेकिन इसे अकेले नागरिकता का निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के अनुसार, नागरिकता से जुड़े मामलों का निपटारा भारतीय कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप किया जाता है।

विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों की भूमिका को लेकर चल रही बहस को नया आयाम मिला है। सरकार का कहना है कि पासपोर्ट की कानूनी भूमिका को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप ही देखा जाना चाहिए।

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