वाशिंगटन। रूस पर नए प्रतिबंध लगाने से जुड़े अमेरिकी सीनेट के संशोधित विधेयक में भारत और चीन को राहत दी गई है। नए प्रस्ताव में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले संभावित टैरिफ की सीमा को पहले के मुकाबले काफी कम कर दिया गया है।
अमेरिकी सांसदों द्वारा पेश किए गए संशोधित विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की योजना है। हालांकि, पहले प्रस्तावित 500 प्रतिशत तक के टैरिफ प्रावधान को घटाकर अधिकतम 100 प्रतिशत तक किया गया है।
इस बदलाव को भारत के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि भारत रूस से कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है। अमेरिकी सांसदों का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करना है, ताकि मॉस्को पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाया जा सके।
संशोधित विधेयक में रूस के अधिकारियों, ऊर्जा परियोजनाओं और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंधों का भी प्रस्ताव है। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों में छूट देने का अधिकार दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विधेयक में बदलाव अमेरिका की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दर्शाता है। भारत पर सीधा आर्थिक प्रभाव कम करने के साथ रूस पर दबाव बनाए रखने का प्रयास किया गया है।





