नई दिल्ली। भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक संपर्क को नई मजबूती देने के उद्देश्य से 10 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई है। इन समझौतों का सबसे अहम पहलू मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी तथा चीन की समुद्री रणनीति को चुनौती मिलेगी।
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। एशिया के बड़े हिस्से का ऊर्जा और व्यापारिक परिवहन इसी रास्ते से होता है। इसे एशिया का “अपना होर्मुज” भी कहा जाता है। भारत की इस क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी से समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक हितों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
समझौतों के तहत दोनों देश बंदरगाह विकास, समुद्री अवसंरचना, रक्षा सहयोग, आपदा प्रबंधन, क्षमता निर्माण, डिजिटल सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। साथ ही नौसैनिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित एवं निर्बाध समुद्री यातायात को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत और इंडोनेशिया की यह साझेदारी सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। सबांग बंदरगाह के विकास से भारतीय नौसेना और व्यापारिक जहाजों की पहुंच आसान होगी, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह पहल भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘सागर’ नीति को भी नई गति देगी।





