नई दिल्ली/जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी इंडोनेशिया यात्रा को भारत-इंडोनेशिया संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे में दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई गति मिलने की संभावना है। यात्रा का मुख्य फोकस डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक सहयोग और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और इंडोनेशिया की QR-आधारित भुगतान प्रणाली को जोड़ने पर सहमति बन सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच डिजिटल लेन-देन और पर्यटन-व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल बाजार और वित्तीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा प्रस्तावित है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। दोनों देश रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति इंडोनेशिया के साथ संयुक्त विकास और तकनीकी हस्तांतरण के नए अवसर खोल सकती है।
इसके साथ ही, स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। इंडोनेशिया भारत के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल और सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली से भी सीख लेने में रुचि दिखा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है।
कुल मिलाकर, यह दौरा भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।





