नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बहाल होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाए गए अधिकांश आपातकालीन प्रतिबंध हटा दिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कहा कि क्षेत्र में युद्धविराम लागू होने, बातचीत आगे बढ़ने और समुद्री यातायात सामान्य होने के कारण अब विशेष नियंत्रण उपायों की आवश्यकता नहीं रह गई है।
सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के बाद प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश लागू किया था। उस दौरान कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर घोषित कर गैस आपूर्ति प्रभावित कर दी थी, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसके चलते सरकार को घरेलू गैस और आयातित एलएनजी के आवंटन को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करने का अधिकार दिया गया था।
आपात व्यवस्था के तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी), परिवहन क्षेत्र के लिए सीएनजी, एलपीजी उत्पादन और उर्वरक संयंत्रों जैसी प्राथमिक श्रेणियों को गैस आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी। वहीं, पेट्रोकेमिकल उद्योगों, बिजली संयंत्रों और कुछ औद्योगिक उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति में कटौती की गई थी ताकि आवश्यक क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में एलएनजी कार्गो की आवाजाही फिर से सामान्य हो चुकी है और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता लौट आई है। ऐसे में आपातकालीन प्रावधानों को वापस लेने का फैसला किया गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की मांग का करीब आधा हिस्सा आयात करता है। इसमें पश्चिम एशिया की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।





