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कक्षा 9 से पढ़ाया जाएगा आपातकाल का इतिहास, एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम में किया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-2023) के तहत कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में आपातकाल (1975-77) के इतिहास को शामिल करने का निर्णय लिया है। पहली बार छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण दौर के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।

नई पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में से एक बताया गया है। पाठ्यक्रम में यह जानकारी दी जाएगी कि आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा था।

एनसीईआरटी के अनुसार, पाठ्यक्रम में यह बदलाव विद्यार्थियों को संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की बेहतर समझ देने के उद्देश्य से किया गया है। नई पुस्तकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें रटने की बजाय अवधारणात्मक और अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर दिया गया है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकाल जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों को लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक संस्थाओं के महत्व को समझने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वे देश के राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से भी परिचित हो सकेंगे।

एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 9 के लिए नया पाठ्यक्रम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। नई पुस्तकों का विकास कार्य जारी है और इन्हें आगामी शैक्षणिक सत्रों में स्कूलों में उपलब्ध कराया जाएगा। पाठ्यक्रम में इतिहास, नागरिक शास्त्र, भूगोल और अर्थशास्त्र को समग्र दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

शिक्षा जगत में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के उतार-चढ़ाव और संवैधानिक मूल्यों की गहरी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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