नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय (कोऑर्डिनेशन) को सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब सभी विभाग एक साझा लक्ष्य के साथ मिलकर कार्य करें और आपसी तालमेल को मजबूत बनाएं।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने हालिया समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी योजना या निर्णय को केवल विभागीय स्तर तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसका व्यापक प्रभाव अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर आंका जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में विकास, सुरक्षा, तकनीक और सामाजिक कल्याण जैसे सभी क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी एक विभाग की कार्यवाही दूसरे विभाग से अलग नहीं हो सकती। इसी कारण मंत्रालयों के बीच सूचना साझा करने, संयुक्त योजना बनाने और तेज निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि जनता तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नीतियों के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन जमीनी स्तर पर किया जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
प्रधानमंत्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक के उपयोग को भी समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से विभागों के बीच दूरी कम होगी और नीतियों की प्रभावशीलता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह जोर प्रशासनिक तंत्र में तेजी, पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल परियोजनाओं की गति बढ़ेगी बल्कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का मानना है कि विभागीय समन्वय को मजबूत करके नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सकता है और जनता को बेहतर सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है।





