नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना देश के किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इस योजना के तहत किसानों को सोलर ऊर्जा अपनाने, डीजल पर निर्भरता कम करने और अतिरिक्त बिजली उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से अब तक 20 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं। योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें “अन्नदाता” के साथ “ऊर्जादाता” बनाना है।
इस योजना के तीन प्रमुख घटक हैं। पहले घटक के तहत किसान अपनी बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर सोलर पावर प्लांट लगाकर उसे बिजली कंपनियों को लीज पर दे सकते हैं। इससे उन्हें प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष स्थिर आय प्राप्त होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे किसानों को लगभग ₹80,000 प्रति हेक्टेयर तक की अतिरिक्त आय संभव है।
दूसरे घटक में डीजल पंपों की जगह सोलर पंप लगाए जा रहे हैं, जिससे सिंचाई लागत में भारी कमी आई है। किसान पहले जहां डीजल और बिजली पर निर्भर थे, अब वे सौर ऊर्जा से कम लागत में सिंचाई कर पा रहे हैं। इससे प्रति वर्ष लगभग ₹60,000 तक की बचत होने का अनुमान है।
तीसरे घटक के तहत ग्रिड से जुड़े सोलर पंपों और फीडर लेवल सोलराइजेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसान अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर उसे बिजली वितरण कंपनियों को बेचकर आय अर्जित कर सकते हैं।
सरकार का कहना है कि यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही, डीजल पर निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रिड कनेक्टिविटी, वित्तीय सहायता और भूमि संबंधी चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है। इसके बावजूद, पीएम-कुसुम योजना को भारत के कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है।





