वॉशिंगटन। अमेरिकी संसद के कुछ सीनेटरों ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए उस पर आतंकवाद को शरण देने और वर्षों तक चरमपंथी नेटवर्क को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। सीनेटरों ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान का इतिहास ऐसे तत्वों को सुरक्षित पनाह देने का रहा है, जिन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा किया।
सीनेटरों ने विशेष रूप से अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक पाकिस्तान में छिपा रहा और वहीं के एबटाबाद शहर में अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान मारा गया था। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा उदाहरण बताया और पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए।
अमेरिकी सांसदों ने दावा किया कि पाकिस्तान का कुछ क्षेत्रों में आतंकवादी संगठनों के प्रति नरम रवैया रहा है और कई बार ऐसे नेटवर्क को या तो प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल अमेरिका बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
बयान में यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध में सहयोगी होने के बावजूद पाकिस्तान की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सीनेटरों ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन या संरक्षण स्वीकार नहीं किया जा सकता और सभी देशों को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
गौरतलब है कि ओसामा बिन लादेन को 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी विशेष बलों ने एक गुप्त ऑपरेशन में मार गिराया था। यह घटना लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही और पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती रही।
इस ताज़ा बयान के बाद अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में फिर से कड़वाहट बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आरोप दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर सकते हैं।
यह मुद्दा एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ दोहरे रवैये और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों को लेकर बहस को तेज कर रहा है।





