देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित हेलंग–मारवाड़ी बाईपास परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस बाईपास के पूरा होने के बाद बदरीनाथ धाम की दूरी लगभग 33 किलोमीटर तक कम हो जाएगी, जिससे तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोशीमठ के पास हेलंग से मारवाड़ी तक बन रहा यह बाईपास सीमा सड़क संगठन (BRO) की ऑल वेदर रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। योजना के तहत यह मार्ग मौजूदा जोशीमठ कस्बे को बायपास करेगा, जिससे न केवल यात्रा समय घटेगा बल्कि कस्बे में लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार, यह बाईपास लगभग 6.5 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसके निर्माण से यात्रियों को जोशीमठ होकर जाने वाले पुराने मार्ग की तुलना में करीब 33 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी। परियोजना का उद्देश्य चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और तेज बनाना है, साथ ही सामरिक दृष्टि से भी यह मार्ग अहम माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2022 में स्वीकृत हुआ था, लेकिन जोशीमठ क्षेत्र में भूधंसाव की घटनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण काम कुछ समय के लिए बाधित भी रहा। बाद में विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट और आवश्यक अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया।
वर्तमान में हिल कटिंग, पुल निर्माण और सड़क चौड़ीकरण का कार्य चरणबद्ध तरीके से जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस बाईपास को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को न केवल यात्रा में समय की बचत होगी, बल्कि मार्ग अधिक सुरक्षित और सुगम भी बनेगा। सरकार का मानना है कि यह बाईपास उत्तराखंड के पर्वतीय परिवहन ढांचे को नई गति देगा और चारधाम यात्रा प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगा।





