देहरादून। हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए तत्कालीन जिलााधिकारी और पूर्व नगर आयुक्त समेत कई अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध बर्खास्तगी सहित कठोर कार्रवाई की सिफारिश की है।
सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में ग्राम सराय स्थित लगभग 2.307 हेक्टेयर भूमि की खरीद में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई थी। आरोप है कि कूड़ा निस्तारण स्थल के निकट स्थित अनुपयुक्त कृषि भूमि को व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित कर करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जबकि कृषि भूमि के रूप में इसकी कीमत काफी कम थी। मामले के सामने आने के बाद शासन ने जांच के आदेश दिए थे।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में तत्कालीन जिलााधिकारी कर्मेंद्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी और तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया और सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को विस्तृत जांच सौंपी गई।
विजिलेंस जांच में भूमि खरीद, भू-उपयोग परिवर्तन और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी पहले ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर चुकी है। वहीं शासन स्तर पर पूरी रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और जनहित के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने विवादित भूमि सौदे को निरस्त करने, भुगतान की राशि की वसूली और संबंधित अवधि के कार्यों का विशेष ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार की इस कार्रवाई को उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियानों में से एक माना जा रहा है। मामले में अंतिम निर्णय शासन द्वारा जांच रिपोर्ट के विस्तृत अध्ययन के बाद लिया जाएगा।





