नई दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची जुलाई 2026 की शुरुआत में भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ सकती हैं। यह उनका प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला भारत दौरा होगा। प्रस्तावित यात्रा को भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और तकनीक सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान प्रधानमंत्री ताकाइची की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से असम में हो सकती है। गुवाहाटी को इस उच्चस्तरीय बैठक के संभावित स्थल के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा कर सकते हैं।
रक्षा और तकनीक सहयोग पर फोकस
भारत और जापान के बीच इस बैठक में समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और उच्च तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान अपने अत्याधुनिक ‘मोगामी क्लास’ स्टील्थ फ्रिगेट भारत को देने की पेशकश पर भी चर्चा कर सकता है। इससे भारतीय नौसेना की क्षमता में बड़ा इजाफा होने की संभावना है।
आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेषकर असम, में जापानी निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर भी बातचीत हो सकती है। असम में सेमीकंडक्टर प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स को दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
चीन को लेकर रणनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्तावित यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक भू-राजनीतिक संदेश भी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत और जापान लगातार अपने संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
हालांकि, अभी इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जापानी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और जापान की संसद (डाइट) की व्यस्तताओं के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
भारत और जापान के बीच यह संभावित शिखर वार्ता दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।




