हरिद्वार। हरिद्वार के धार्मिक संगठनों और संतों ने लोगों से आग्रह किया है कि वे भोजन में वेज पुलाव को प्राथमिकता दें और वेज बिरयानी के सेवन से बचें। उनका कहना है कि स्वास्थ्य और पाचन के दृष्टिकोण से पुलाव अधिक फायदेमंद और संतुलित विकल्प है।
संतों का कहना है कि वेज बिरयानी में मसालों और घी की अधिक मात्रा होती है, जिससे पाचन पर भार पड़ता है। इसके विपरीत, साधारण वेज पुलाव हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन है। धार्मिक कार्यक्रमों और साधना के दौरान संतुलित भोजन का सेवन करना जरूरी है, ताकि शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहें।
धार्मिक नेताओं ने स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे अपने भोजन में साधारणता और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि भोजन का उद्देश्य केवल स्वाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवनशैली को संतुलित रखना भी होना चाहिए।
हरिद्वार में आयोजित एक धार्मिक सभा में संतों ने कहा कि पारंपरिक भारतीय भोजन शैली में सरल और प्राकृतिक विकल्प अपनाना सबसे उचित है। उन्होंने युवाओं और तीर्थयात्रियों को प्रेरित किया कि वे अपने भोजन में कम मसालों वाले और पौष्टिक विकल्प चुनें।
स्थानीय व्यवसायियों और आयोजकों ने भी संतों की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में स्वास्थ्यप्रद भोजन पर जोर देने से तीर्थयात्रियों और भक्तों के बीच जागरूकता बढ़ेगी।
इस पहल का उद्देश्य केवल भोजन का चुनाव बदलना नहीं, बल्कि लोगों में संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली को बढ़ावा देना है। संतों ने कहा कि भोजन में संयम और पोषण का ध्यान रखना आध्यात्मिक जीवन का भी हिस्सा है।
हरिद्वार के संतों की यह सलाह धार्मिक आयोजनों और तीर्थयात्रियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। उनका मानना है कि वेज पुलाव न केवल पाचन के लिए बेहतर है, बल्कि यह साधु–संत और आम जनता के लिए सरल और सुलभ विकल्प भी है।





