नई दिल्ली: दुनिया में यात्रा की स्वतंत्रता और वीज़ा-फ्री एंट्री के आधार पर जारी हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में एक बार फिर एशियाई देशों का दबदबा देखने को मिला है। इस सूची में सिंगापुर ने शीर्ष स्थान हासिल करते हुए दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट होने का गौरव बरकरार रखा है। सिंगापुर के पासपोर्ट धारक बिना वीज़ा के बड़ी संख्या में देशों की यात्रा कर सकते हैं, जिससे यह वैश्विक मोबिलिटी के मामले में पहले स्थान पर बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, जापान और दक्षिण कोरिया भी मजबूत पासपोर्ट की सूची में शीर्ष स्थानों पर शामिल हैं, जबकि कई यूरोपीय देश भी उच्च रैंकिंग में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। यह दर्शाता है कि विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत देशों के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा में अधिक सुविधा मिल रही है।
भारत की बात करें तो इस इंडेक्स में भारतीय पासपोर्ट को 75वें स्थान पर रखा गया है। भारतीय नागरिकों को लगभग 55 से 56 देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है, जिससे पिछले वर्षों की तुलना में स्थिति में कुछ सुधार देखा गया है।
वहीं, अमेरिका का पासपोर्ट भी शीर्ष 10 में अपनी जगह बनाए रखने के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है और पिछली कुछ रैंकिंग्स में इसमें गिरावट दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक नीतियों और कूटनीतिक बदलावों का सीधा असर पासपोर्ट की ताकत पर पड़ रहा है।
पाकिस्तान जैसे देशों की स्थिति इस सूची में काफी नीचे बनी हुई है, जहां नागरिकों को सीमित देशों में ही वीज़ा-फ्री यात्रा की सुविधा प्राप्त है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रैंकिंग केवल यात्रा सुविधा ही नहीं बल्कि किसी देश की वैश्विक कूटनीतिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी दर्शाती है। जैसे-जैसे देशों के बीच समझौते बढ़ रहे हैं, आने वाले वर्षों में इस सूची में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।





