Top 5 This Week

Related Posts

लिपुलेख दर्रे से फिर शुरू होगा व्यापार, भारत-चीन संबंधों को मिल सकती है नई दिशा

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार फिर से शुरू होने की तैयारी तेज हो गई है। करीब छह वर्षों के अंतराल के बाद इस व्यापारिक गतिविधि की बहाली को दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कोविड-19 महामारी और उसके बाद सीमा पर उत्पन्न तनाव के कारण वर्ष 2020 से यह व्यापार बंद था। अब केंद्र सरकार की अनुमति मिलने के बाद जून से सितंबर तक चलने वाले पारंपरिक व्यापार सत्र को पुनः शुरू करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

लिपुलेख दर्रा ऐतिहासिक रूप से भारत और तिब्बत क्षेत्र के बीच व्यापार, सांस्कृतिक संपर्क और धार्मिक यात्राओं का प्रमुख मार्ग रहा है। यह दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है और सीमावर्ती क्षेत्रों की आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है।

सीमा व्यापार की बहाली से न केवल स्थानीय व्यापारियों और भोटिया समुदाय को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, बल्कि सीमांत गांवों में रोजगार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक संपर्क बढ़ने से द्विपक्षीय विश्वास मजबूत होगा और भारत-चीन संबंधों में संवाद की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, स्थानीय उत्पादों के निर्यात और पारंपरिक व्यापार मार्गों के पुनर्जीवन से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार व्यापार शुरू होने से पहले आवश्यक व्यवस्थाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

लंबे समय बाद खुल रहा यह मार्ग कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो हिमालयी सीमा क्षेत्रों को फिर से व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र बना सकता है।

Popular Articles