नई दिल्ली/कोलकाता।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेतित किया है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए बढ़त बनाई और लंबे समय से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी चुनौती दी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में भाजपा की बढ़त के पीछे तथाकथित ‘एम फैक्टर’ निर्णायक साबित हुआ।
दरअसल, बंगाल की राजनीति लंबे समय तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘3 एम’—माइनॉरिटी, महिला और ग्रामीण सामाजिक समीकरण—के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन 2026 के चुनाव में भाजपा ने अपने अभियान को कई नए सामाजिक और राजनीतिक समूहों पर केंद्रित किया, जिसे अब ‘5 एम फैक्टर’ कहा जा रहा है।
क्या है भाजपा का ‘एम फैक्टर’?
विश्लेषकों के अनुसार भाजपा की चुनावी रणनीति पाँच प्रमुख समूहों पर आधारित रही—
- मुस्लिम वोट समीकरण:
मतदाता सूची संशोधन और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों को भाजपा ने प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाया। इससे ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हुई और विपक्षी वोट बैंक प्रभावित हुआ। - महिला मतदाता (महिला फैक्टर):
महिलाओं की सुरक्षा, कल्याण योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को भाजपा ने जोरदार तरीके से उठाया। महिला वोट इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते दिखाई दिए। - प्रवासी (माइग्रेंट) वोट:
राज्य से बाहर काम करने वाले बंगाली मजदूरों और युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश भाजपा ने संगठित तरीके से की, जिससे नए मतदाता समूह जुड़े। - मतुआ समुदाय:
सीमावर्ती जिलों में प्रभाव रखने वाला मतुआ समुदाय भाजपा के लिए अहम समर्थन आधार बनकर उभरा। नागरिकता और पहचान से जुड़े मुद्दे यहां निर्णायक बने। - मजबूत चुनावी मशीनरी:
भाजपा ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया। उत्तर बंगाल में पकड़ बनाए रखते हुए दक्षिण बंगाल में विस्तार की रणनीति अपनाई गई, जिसने चुनावी समीकरण बदल दिए।
सत्ता विरोधी माहौल भी बना कारक
लगभग डेढ़ दशक से सत्ता में रही टीएमसी के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी भी देखने को मिली। रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर मतदाताओं ने बदलाव की इच्छा जताई। चुनाव को कई विश्लेषकों ने “निरंतरता बनाम परिवर्तन” की लड़ाई बताया।
ऐतिहासिक राजनीतिक मोड़
294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटें जरूरी हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा इस आंकड़े से आगे निकलती दिखी, जिसे बंगाल की राजनीति में संभावित ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
बंगाल चुनाव 2026 केवल सत्ता परिवर्तन का चुनाव नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों के पुनर्गठन का संकेत माना जा रहा है। ‘एम फैक्टर’ ने यह दिखा दिया कि बंगाल की राजनीति अब पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़कर नए सामाजिक गठजोड़ की ओर बढ़ रही है।





