देहरादून: उत्तराखंड की पवित्र हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारी बर्फबारी के बीच भारतीय सेना और सेवादारों की टीम ने कठिन परिस्थितियों में मार्ग से बर्फ हटाकर यात्रा मार्ग को खोलने का महत्वपूर्ण कार्य पूरा किया। इसके साथ ही हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा परिसर में पहुंची टीम ने पहली अरदास भी संपन्न की, जिसे यात्रा शुरू होने की औपचारिक तैयारी का अहम चरण माना जाता है।
समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब तक पहुंचने वाला मार्ग सर्दियों में पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है। हर वर्ष यात्रा शुरू होने से पहले सेना, प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति मिलकर रास्ते को सुरक्षित बनाने का कार्य करते हैं। इस वर्ष भी जवानों ने कई फीट मोटी बर्फ को काटकर पैदल मार्ग को साफ किया, जिससे श्रद्धालुओं के लिए आवाजाही संभव हो सके।
जानकारी के अनुसार, सेना की टीम सबसे पहले गुरुद्वारा परिसर तक पहुंची और पारंपरिक रीति से अरदास कर यात्रा की सफल शुरुआत की कामना की। मौसम की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद जवानों और सेवादारों ने लगातार अभियान चलाकर मार्ग बहाल किया।
राज्य प्रशासन द्वारा भी यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मार्ग पर सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, संचार व्यवस्था और राहत सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।
हेमकुंड साहिब सिख श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थों में से एक है, जहां हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बर्फ हटाने और पहली अरदास के साथ अब यात्रा सीजन की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि निर्धारित तिथि के अनुसार जल्द ही श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग खोल दिया जाएगा और पहली जत्था यात्रा के लिए रवाना होगा। सेना और प्रशासन का संयुक्त प्रयास कठिन हिमालयी परिस्थितियों में आस्था और सेवा की मिसाल माना जा रहा है।





