वॉशिंगटन: अमेरिका की सीनेट में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) को समर्थन देने वाला विधेयक पेश किया गया है, जिसे वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल को चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।
प्रस्तावित कॉरिडोर भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को रेल, समुद्री मार्ग, डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा कनेक्टिविटी के जरिए जोड़ने की परिकल्पना करता है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यह परियोजना वैश्विक व्यापार मार्गों को अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाएगी तथा सहयोगी देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई गति देगी।
सीनेट में पेश बिल के अनुसार यह कॉरिडोर क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से माल ढुलाई के समय और लागत में कमी आने की संभावना जताई गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धी बनेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि IMEC परियोजना हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच रणनीतिक महत्व रखती है। भारत के लिए यह यूरोप तक वैकल्पिक व्यापार मार्ग विकसित करने का अवसर है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यह विश्व स्तर पर सप्लाई चेन विविधीकरण की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।
इस परियोजना की घोषणा पिछले वर्ष जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी, जिसमें भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय देशों सहित कई भागीदार शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह परियोजना तय समयसीमा में आगे बढ़ती है, तो वैश्विक व्यापार मानचित्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और एशिया-यूरोप आर्थिक संपर्क को नया स्वरूप मिल सकता है।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर को अमेरिकी सीनेट का समर्थन, वैश्विक कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम




