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उत्तराखंड चुनावी तैयारी: बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति में भाजपा ने मारी बाजी, आप और एनपीपी का अब तक नहीं खुला खाता

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राजनीतिक दलों ने धरातल पर अपनी किलेबंदी शुरू कर दी है। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के पालन में बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति के मामले में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे आगे निकल गई है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी इस रेस में मजबूती से डटी हुई है। हालांकि, राष्ट्रीय दल का दर्जा रखने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) इस महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया में अब तक पूरी तरह शून्य साबित हुई हैं।

भाजपा और कांग्रेस के बीच ‘बूथ’ पर कड़ी टक्कर

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के प्रमुख दलों ने बूथ स्तर पर अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति में तत्परता दिखाई है।

  • भाजपा का प्रदर्शन: भाजपा ने राज्य के 89.93 प्रतिशत बूथों पर अपने बीएलए नियुक्त कर दिए हैं। पार्टी ने विशेष रूप से पांच जिलों—रुद्रप्रयाग, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत में शत-प्रतिशत नियुक्ति का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
  • कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए 84.11 प्रतिशत बूथों पर अपने प्रतिनिधि तैनात कर दिए हैं। कांग्रेस ने चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और चंपावत जैसे चार जिलों में अपने बीएलए की 100 प्रतिशत तैनाती पूरी कर ली है।

आम आदमी पार्टी और एनपीपी का खराब प्रदर्शन

हैरानी की बात यह है कि राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश करने वाली आम आदमी पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी ने अब तक एक भी बीएलए नियुक्त नहीं किया है।

“निर्वाचन आयोग के बार-बार अनुरोध और बैठकों के बावजूद इन दोनों राष्ट्रीय दलों का खाता न खुलना चिंताजनक है। बूथ स्तर पर एजेंटों की अनुपस्थिति का सीधा असर मतदाता सूची के शुद्धिकरण और आगामी चुनावों की पारदर्शिता पर पड़ सकता है।”निर्वाचन विभाग के सूत्र

मतदाता सूची शुद्धिकरण में बीएलए की अहम भूमिका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बीएलए की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

  • बीएलए का कार्य: ये एजेंट बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि मतदाता सूची में कोई फर्जी नाम न रहे और पात्र व्यक्तियों के नाम छूट न जाएं।
  • अब तक की प्रगति: निर्वाचन आयोग के प्रयासों से प्रदेश में अब तक कुल 20,863 से अधिक बीएलए नियुक्त किए जा चुके हैं।

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