कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के ताजा अनुमानों के अनुसार, राज्य की मतदाता सूची से हटाए गए नामों की कुल संख्या लगभग 91 लाख तक पहुँच गई है। हालांकि आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अंतिम सूची जारी नहीं की है, लेकिन न्यायिक निर्णय प्रक्रिया लगभग पूरी होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं।
न्यायिक प्रक्रिया और ई-हस्ताक्षर का अंतिम चरण
निर्वाचन आयोग के सूत्रों और आईएएनएस (IANS) से मिली जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए इसे न्यायिक अधिकारियों के निर्णय के अधीन रखा गया था।
- प्रक्रिया की स्थिति: पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, न्यायिक निर्णय के लिए कुल 60,06,675 मामले भेजे गए थे।
- पूर्ण हुए मामले: इनमें से 59,84,512 मामलों में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और संबंधित न्यायिक अधिकारियों ने इन पर अपने ई-हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
- अंतिम डेटा की प्रतीक्षा: अब केवल एक बहुत छोटे हिस्से पर डिजिटल हस्ताक्षर होने शेष हैं, जिसके तुरंत बाद निर्वाचन आयोग आधिकारिक तौर पर अंतिम आंकड़े सार्वजनिक कर देगा।
मुर्शिदाबाद में सर्वाधिक नाम हटाए गए
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि दोहरी प्रविष्टि (एक ही व्यक्ति का दो जगह नाम होना), पलायन और मृत्यु जैसे कारणों के अलावा दस्तावेजों में विसंगतियों की वजह से इतने बड़े पैमाने पर नामों में कटौती हुई है।
“न्यायिक अधिकारियों द्वारा गहन जांच के बाद 59,84,512 मामलों में से अब तक 27,16,393 मतदाताओं को आधिकारिक रूप से सूची से हटाने योग्य पाया गया है और उनके नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या कुल अनुमानित 91 लाख की कटौती का ही एक हिस्सा है।”
विवाद और राजनीतिक सरगर्मी
इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने से राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ना तय माना जा रहा है। विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
- निर्वाचन आयोग की सफाई: आयोग का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य ‘शुद्ध मतदाता सूची’ (Clean Electoral Roll) सुनिश्चित करना है ताकि फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म की जा सके।
- आगे की कार्रवाई: जिन लोगों के नाम सूची से कटे हैं, उन्हें नियमानुसार अपील करने और उचित दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना नाम वापस जुड़वाने का अवसर दिया जाएगा।
पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ चुनाव बेहद कड़े मुकाबले वाले होते हैं, वहां 91 लाख मतदाताओं का सूची से बाहर होना एक ऐतिहासिक और निर्णायक घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग द्वारा जारी होने वाले अंतिम आधिकारिक आंकड़ों पर टिकी हैं।





