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‘अमेरिका से कोई शांति वार्ता नहीं’: पाकिस्तान में ईरानी राजदूत ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों को बताया ‘झूठा’, कहा- ये जंग धोखेबाजी का नतीजा

इस्लामाबाद (25 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी विनाशकारी युद्ध और भीषण तनाव के बीच, ईरान ने एक बार फिर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता से पूरी तरह इनकार कर दिया है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत, रजा अमीरी मोगदम, ने इस्लामाबाद में दिए गए एक तीखे बयान में साफ किया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच वर्तमान में कोई बातचीत नहीं चल रही है। ईरानी राजदूत का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया दावे को सीधे तौर पर खारिज करता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच “पर्दे के पीछे” बातचीत चल रही है और युद्ध जल्द ही खत्म हो सकता है। ईरान के इस सख्त और अडिग रुख ने मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों पर फिर से पानी फेर दिया है, जिससे यह साफ है कि हालात अभी सामान्य होने से बहुत दूर हैं।

ट्रंप के दावों की हवा: राजदूत मोगदम का करारा प्रहार

पाकिस्तानी राजदूत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” और “झूठा” करार दिया:

  • वार्ता से इनकार: मोगदम ने कहा कि ईरान अमेरिकी प्रशासन के साथ किसी भी तरह की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि “वाशिंगटन की ओर से कोई गंभीर पहल नहीं की गई है” और न ही ईरान “धोखेबाज” प्रशासन के साथ चर्चा करने में कोई दिलचस्पी रखता है।
  • ट्रंप का दावा: पिछले दिनों राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच “तीसरे पक्ष” के माध्यम से बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि मिडिल ईस्ट में जारी “बड़ा युद्ध” अगले कुछ दिनों में समाप्त हो सकता है।
  • स्थिति उलझी: ईरानी राजदूत के इस खंडन ने मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक उलझनों को और बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां अमेरिका शांति का दावा कर रहा है, वहीं ईरान इसे पूरी तरह नकार रहा है, जिससे वैश्विक समुदाय में अनिश्चितता का माहौल है।

‘धोखेबाजी का नतीजा’: ईरान ने अमेरिका को बताया जिम्मेदार

राजदूत मोगदम ने मिडिल ईस्ट में जारी हिंसा और अस्थिरता के लिए अमेरिका की “गलत नीतियों” को जिम्मेदार ठहराया:

  1. जंग की जड़: उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी वर्तमान संघर्ष “अमेरिका की धोखेबाज और एकतरफा नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम” है। ईरान का मानना है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों (जैसे 2015 का परमाणु समझौता – JCPOA) को तोड़कर और क्षेत्र में हस्तक्षेप करके युद्ध की नींव रखी।
  2. विश्वास का संकट: ईरानी राजदूत ने स्पष्ट किया कि तेहरान “अमेरिका पर कभी विश्वास नहीं कर सकता”, क्योंकि उसने बार-बार अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है। “जब तक अमेरिका प्रतिबंधों और आक्रामकता की अपनी नीति नहीं बदलता, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है,” उन्होंने जोर देकर कहा।
  3. गहरी खाई: यह बयान दोनों देशों के बीच अविश्वास और शत्रुता की गहरी खाई को दर्शाता है। ईरान के लिए, अमेरिका के साथ वार्ता एक “अस्वीकार्य” विकल्प बन गया है, जब तक कि उसके मूल सुरक्षा हितों को संबोधित नहीं किया जाता।

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