Bangladesh सरकार ने भारत में मुसलमानों के कथित उत्पीड़न को लेकर Bangladesh Jamaat-e-Islami के बयानों से दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि यह पार्टी का अपना राजनीतिक दृष्टिकोण है, सरकार का आधिकारिक रुख नहीं।
हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल और असम चुनावों के बाद जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेताओं ने भारत में मुसलमानों के खिलाफ कथित उत्पीड़न और भेदभाव के आरोप लगाए थे। पार्टी नेताओं ने ढाका में भारतीय उच्चायुक्त को तलब करने की मांग भी उठाई थी।
हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को लेकर संतुलित रुख अपनाया है। सरकार की ओर से कहा गया कि भारत एक संप्रभु देश है और वहां के आंतरिक मामलों पर आधिकारिक टिप्पणी करने से बचा जाना चाहिए। ढाका ने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के संबंधों को राजनीतिक बयानों से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की राजनीति में Bangladesh Jamaat-e-Islami का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में फिर बढ़ा है। 2025 में पार्टी पर लगा प्रतिबंध हटने और 2026 चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद जमात अब देश की प्रमुख विपक्षी ताकतों में शामिल मानी जा रही है।
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हाल के समय में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, अल्पसंख्यक मुद्दों और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में ढाका सरकार का यह रुख दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।




