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उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला, मदरसों को मान्यता और पंजीकरण के लिए देनी होगी फीस

उत्तराखंड सरकार ने मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता एवं पंजीकरण नियमावली को मंजूरी दे दी गई। नई व्यवस्था के तहत अब मदरसों को मान्यता और पंजीकरण के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा।

सरकार का कहना है कि नई नियमावली का उद्देश्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके तहत संस्थानों के पंजीकरण, नवीनीकरण और मान्यता के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए जाएंगे। हालांकि सरकार की ओर से शुल्क की विस्तृत दरें बाद में अधिसूचित की जाएंगी।

कैबिनेट बैठक में यह भी तय किया गया कि कक्षा एक से आठवीं तक संचालित मदरसों को जिला स्तरीय शिक्षा समिति से संबद्धता दी जाएगी, जबकि कक्षा नौ से 12वीं तक के संस्थानों को पहले की तरह विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। सरकार का कहना है कि इससे छोटे मदरसों को प्रशासनिक सुविधा मिलेगी और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी।

राज्य सरकार पहले ही उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 लागू कर चुकी है। इसके तहत धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों को नए सिरे से मान्यता लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण धार्मिक शिक्षा के लिए नया पाठ्यक्रम भी तैयार कर रहा है, जिसे लागू करने के बाद ही मदरसों को मान्यता दी जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति संचालित मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। राज्य में वर्तमान में 450 से अधिक मदरसे संचालित हैं, जिनमें बड़ी संख्या प्राथमिक स्तर के संस्थानों की है।

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