Top 5 This Week

Related Posts

बजट के शत-प्रतिशत उपयोग पर मुख्य सचिव का सख्त रुख: किसी भी योजना की धनराशि नहीं होनी चाहिए लैप्स; खर्च की गति बढ़ाने के निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण को देखते हुए सभी सरकारी विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को सचिवालय में आयोजित सचिव समिति की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में किसी परियोजना का बजट ‘लैप्स’ (व्यपगत) नहीं होना चाहिए। मुख्य सचिव ने विभागों को आवंटित धनराशि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने और विकास कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक: विकास कार्यों और निवेश पर केंद्रित चर्चा

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न श्रेणियों की योजनाओं की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया। इस उच्चस्तरीय चर्चा में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निर्धारित बजट के खर्च की समीक्षा की गई।
  • केंद्र पोषित एवं बाह्य सहायता प्राप्त योजनाएं: केंद्र सरकार और विदेशी संस्थाओं द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया।
  • नाबार्ड और विशेष सहायता योजनाएं: नाबार्ड द्वारा समर्थित ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास और ‘स्पेशल असिस्टेंस स्कीम फार कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ (SASCI) के तहत हो रहे कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।

समयबद्धता और गंभीरता पर जोर: ‘बजट शेष न रहे’

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बजट का समय पर उपयोग न होना राज्य के विकास में बाधक है। उन्होंने निर्देशों में कहा:

  1. विकास को गति: मुख्य सचिव ने कहा कि पूंजीगत व्यय सीधा राज्य की प्रगति से जुड़ा है, इसलिए परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
  2. शत-प्रतिशत उपयोग: उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि आवंटित बजट का पूरा इस्तेमाल किया जाए और कोई भी धनराशि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर शेष नहीं रहनी चाहिए।
  3. गंभीरता से कार्य करें: अधिकारियों को फील्ड स्तर पर आने वाली बाधाओं को तत्काल दूर करने और फाइलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए गंभीरता से कार्य करने की हिदायत दी गई।

प्रशासनिक सतर्कता और आगामी लक्ष्य

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन विभागों का प्रदर्शन बजट खर्च करने में धीमा है, उनकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुख्य सचिव ने कहा कि योजनाओं की गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करना अनिवार्य है। विशेष रूप से उन परियोजनाओं पर ध्यान देने को कहा गया जो अंतिम चरण में हैं और जिनके लिए भुगतान (Payment) की प्रक्रिया लंबित है।

Popular Articles