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संसद में घमासान: ‘खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं कुछ लोग’, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर रिजिजू का विपक्ष पर करारा प्रहार

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दूसरे दिन आज लोकसभा में ऐतिहासिक और तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। रिजिजू ने आंकड़ों और पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया और अध्यक्ष की निष्पक्षता का पुरजोर समर्थन किया।

अडवाणी के अनुशासन का दिया हवाला: ‘आज मर्यादाएं टूट रही हैं’

सदन को संबोधित करते हुए किरेन रिजिजू ने नवंबर 2004 की एक घटना याद दिलाई। उन्होंने बताया कि किस तरह उस समय विपक्ष में रहते हुए बीजेपी सदस्यों ने ‘अफजल गुरु को फांसी दो’ के नारे लगाते हुए सदन के बीच (वेल) में जाने की कोशिश की थी।

  • सीख की याद: रिजिजू ने कहा कि उस वक्त तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी ही पार्टी के सांसदों को कड़ी फटकार लगाई थी और उन्हें अपनी सीट से ही विरोध करने का निर्देश दिया था।
  • वर्तमान स्थिति पर चिंता: उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आज के दौर में विपक्ष की मर्यादा इतनी गिर गई है कि सदस्य सीधे प्रधानमंत्री के सामने आकर नारेबाजी करते हैं।

राहुल गांधी पर निशाना: ‘स्पीकर से बड़ा कोई नहीं’

रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन बयानों पर सवाल उठाए जिनमें उन्होंने कहा था कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता:

  1. संसदीय नियम: उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में बोलने के लिए अध्यक्ष (स्पीकर) की अनुमति अनिवार्य है और उनके बिना कोई सदस्य नहीं बोल सकता।
  2. वरिष्ठ नेताओं को नसीहत: रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस में इतने वरिष्ठ नेता हैं, उन्होंने राहुल गांधी को यह क्यों नहीं समझाया कि वे खुद को संविधान और स्पीकर से ऊपर न समझें।”
  3. ज्ञान का अहंकार: उन्होंने कहा कि कुछ लोग खुद को बहुत ज्यादा ज्ञानी समझते हैं और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना अपनी आदत बना चुके हैं।

आंकड़ों से दी गवाही: ‘विपक्ष को मिले सत्ता पक्ष से अधिक मौके’

विपक्ष के ‘भेदभाव’ के आरोपों को खारिज करने के लिए रिजिजू ने सदन की उत्पादकता के आंकड़े पेश किए:

  • उच्च उत्पादकता: 18वीं लोकसभा में अब तक 93% से अधिक कार्य उत्पादकता रही है, जो अध्यक्ष की कार्यकुशलता का प्रमाण है।
  • सवालों का अवसर: उन्होंने बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने जहाँ सत्ता पक्ष को 321 सवाल पूछने का मौका दिया, वहीं विपक्ष को 362 सवाल पूछने का अवसर दिया गया।
  • निष्पक्षता का दावा: इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने दावा किया कि अध्यक्ष ने विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त से भी अधिक समय दिया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता मान

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि ओम बिरला के नेतृत्व में भारतीय संसद का वैश्विक स्तर पर मान बढ़ा है। उनके प्रयासों से 64 देशों का ‘फ्रेंडशिप ग्रुप’ बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं ओम बिरला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में अध्यक्ष ने सदन की गरिमा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।

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