रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर): भारत की आगामी जनगणना अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है और रुद्रपुर सहित पूरे जिले में इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आगामी 10 अप्रैल से एक विशेष वेब पोर्टल आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नागरिक अब जनगणना कर्मियों का इंतजार किए बिना ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ (Self-Enumeration) के जरिए अपना और अपने परिवार का विवरण खुद ऑनलाइन भर सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की शुद्धता और गोपनीयता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
डिजिटल जनगणना: क्या है नई व्यवस्था?
पारंपरिक कागजी जनगणना के बजाय इस बार पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस बनाया गया है। प्रशासन ने इसके लिए मुख्य रूप से तीन स्तरों पर योजना बनाई है:
- वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप: नागरिक अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉगिन करके निर्धारित 31 सवालों के जवाब दे सकेंगे। इसके लिए घर बैठे ही पोर्टल पर जानकारी अपलोड की जा सकेगी।
- QR कोड की सुविधा: अपना विवरण ऑनलाइन भरने के बाद नागरिक को एक संदर्भ संख्या (Reference Number) या QR कोड प्राप्त होगा। जब जनगणना कर्मी घर आएंगे, तो उन्हें केवल वह कोड दिखाना होगा, जिससे डेटा स्वतः सिंक हो जाएगा।
- डिजिटल मैप्स: इस बार जनगणना में पहली बार डिजिटल मैपिंग का उपयोग किया जा रहा है, जिससे रुद्रपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों के वार्ड और मोहल्लों की सटीक सीमाएं निर्धारित की जा सकेंगी।
10 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण
जिला प्रशासन के अनुसार, वेब पोर्टल 10 अप्रैल से सक्रिय हो जाएगा। नागरिकों को इसमें शामिल होने के लिए कुछ सरल चरणों का पालन करना होगा:
- लॉगिन: नागरिक को अपने आधार कार्ड या मोबाइल नंबर से ओटीपी (OTP) के जरिए पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।
- विवरण साझा करना: परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, धर्म, भाषा, आवास की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं (जैसे बिजली, पानी, शौचालय) की जानकारी भरनी होगी।
- सुरक्षित डेटा: सरकार ने आश्वासन दिया है कि डिजिटल रूप में लिया गया डेटा पूरी तरह एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित होगा।
प्रशासन की तैयारी: रुद्रपुर में विशेष इंतजाम
रुद्रपुर की बढ़ती आबादी और औद्योगिक क्षेत्र को देखते हुए प्रशासन ने विशेष टीमें गठित की हैं:
- प्रशिक्षण: जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों को टैबलेट और स्मार्टफोन के जरिए डेटा फीड करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- जागरूकता अभियान: जो लोग तकनीक से परिचित नहीं हैं, उनकी सहायता के लिए नगर निगम और तहसील स्तर पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे।
- समय सीमा: पोर्टल 10 अप्रैल से एक निश्चित समय अवधि के लिए खुलेगा, जिसके बाद प्रगणक घर-घर जाकर छूटे हुए लोगों का डेटा मैन्युअल रूप से डिजिटल डिवाइस में दर्ज करेंगे।





