नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आगामी इजरायल दौरे के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं। वे इजरायल की संसद, जिसे ‘नेसेट’ (Knesset) कहा जाता है, को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रिश्तों पर विस्तार से बात की। उन्होंने न केवल इस दौरे को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया, बल्कि इजरायल को भारत का एक ‘अटूट मित्र’ और ‘प्रौद्योगिकी का पावरहाउस’ करार दिया।
‘नेसेट’ में संबोधन: भारत के गौरव का क्षण
इजरायली संसद में प्रधानमंत्री का संबोधन वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद का प्रतीक है:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: आज तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायल का आधिकारिक दौरा कर वहां की संसद को संबोधित नहीं किया था।
- साझा लोकतांत्रिक मूल्य: पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल दो ऐसे लोकतंत्र हैं जो अपनी प्राचीन सभ्यताओं और आधुनिक नवाचारों के बल पर दुनिया को नई दिशा दे रहे हैं।
- वैश्विक संदेश: इस संबोधन के जरिए प्रधानमंत्री आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और रक्षा सहयोग पर भारत का पक्ष मजबूती से रख सकते हैं।
रवानगी से पहले प्रधानमंत्री के मुख्य बिंदु
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक बयान में इस यात्रा के उद्देश्यों को स्पष्ट किया:
- सुरक्षा और आतंकवाद: पीएम ने कहा कि भारत और इजरायल दोनों ही आतंकवाद के पीड़ित रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग अब पहले से कहीं अधिक गहरा होगा।
- कृषि और जल प्रबंधन: प्रधानमंत्री ने इजरायल की सिंचाई तकनीक (Drip Irrigation) और खारे पानी को मीठा बनाने की तकनीक की सराहना की। उन्होंने कहा कि “मैं यह देखना चाहता हूँ कि कैसे इजरायली तकनीक भारत के किसानों की आय दोगुनी करने में मदद कर सकती है।”
- ‘मेक इन इंडिया’ में भागीदारी: उन्होंने इजरायली कंपनियों को भारत के रक्षा क्षेत्र में निवेश करने और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया।
सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि जन-जन के जुड़ाव (People-to-People Connect) पर भी बात की:
- भारतीय मूल के यहूदी: पीएम ने कहा कि इजरायल में रह रहे भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के लोग दोनों देशों के बीच एक ‘जीवंत सेतु’ का काम करते हैं।
- नवाचार का संगम: उन्होंने इजरायल को ‘स्टार्टअप नेशन’ बताते हुए भारतीय युवाओं के लिए वहां मौजूद अवसरों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।





