देहरादून/हरिद्वार।
उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर जहां धामी सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है और नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, वहीं एक बार फिर भाजपा नेता का नाम परीक्षा गड़बड़ी से जुड़ गया है। इस बार मामला भाजपा हरिद्वार जिला संगठन के जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र चौहान के स्कूल का है। रविवार को आयोजित अधीनस्थ चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा में यहां से पेपर लीक होने की बात सामने आई।
भाजपा नेता के स्कूल से जुड़ा मामला
धर्मेंद्र चौहान भाजपा किसान मोर्चा के जिला महामंत्री समेत कई पदों पर रह चुके हैं और पार्टी में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। लेकिन परीक्षा गड़बड़ी से उनका स्कूल जुड़ने के बाद संगठन को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर स्कूल की तस्वीरें और चौहान के मुख्यमंत्री के साथ फोटो वायरल हो रहे हैं।
संगठन ने भेजी रिपोर्ट
भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा की ओर से हाईकमान को रिपोर्ट भेज दी गई है। इसमें साफ किया गया है कि स्कूल परीक्षा कराने के लिए आयोग को उपलब्ध कराया जाता है और प्रबंधन का परीक्षा की प्रक्रिया में कोई दखल नहीं होता। जिस कक्ष से पेपर लीक का प्रकरण सामने आया, वहां स्कूल के स्टाफ की ड्यूटी भी नहीं लगी थी। संगठन ने दावा किया है कि चौहान का सीधे तौर पर पेपर लीक से कोई संबंध नहीं है।
दो साल पहले भी भाजपा नेता फंसे थे
यह पहली बार नहीं है जब भर्ती परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण में भाजपा नेताओं का नाम जुड़ा हो। वर्ष 2022-23 में लोक सेवा आयोग की पटवारी और जेई-एई परीक्षा पेपर लीक में भाजपा नेता और नारसन के मोहम्मदपुर गांव के ग्राम प्रधान, पूर्व मंडल अध्यक्ष संजय धारीवाल की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था और उनकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
पार्टी की बढ़ी किरकिरी
भाजपा सरकार भर्तियों को पारदर्शी बनाने और सख्त कानून लागू करने का दावा कर रही है, लेकिन बार-बार भाजपा नेताओं का नाम पेपर लीक प्रकरणों में आने से विपक्ष को हमले का मौका मिल रहा है। फिलहाल, हाईकमान मामले पर नजर रखे हुए है और जिला संगठन से मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।





