चेन्नई। इंडि और तमिल भाषा को लेकर चल रही बहस के बीच डीएमके सांसद कनिमोझी ने रविवार को स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में हिंदी थोपना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति हज़ारों वर्षों पुरानी है और इसकी गहरी जड़ें तमिल समाज में समाई हुई हैं। किसी बाहरी भाषा या विचार से इसे प्रभावित नहीं किया जा सकता।
कनिमोझी ने कहा कि तमिलनाडु की जनता अपनी मातृभाषा और संस्कृति के संरक्षण को लेकर हमेशा सजग रही है। “तमिल केवल एक भाषा नहीं बल्कि हमारी पहचान, इतिहास और जीवन शैली का हिस्सा है। इसे दबाने या किसी अन्य भाषा को थोपने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी।”
डीएमके सांसद ने यह भी कहा कि देश की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में किसी एक भाषा को पूरे देश पर थोपना व्यावहारिक और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सभी भाषाओं और संस्कृतियों को समान सम्मान दिया जाए।
भाषा विवाद के संदर्भ में कनिमोझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दल केंद्र की हिंदी-प्रचार नीतियों का विरोध कर रहे हैं। तमिलनाडु में पहले भी हिंदी थोपने के खिलाफ बड़े आंदोलन हो चुके हैं और जनता का रुख हमेशा मातृभाषा की रक्षा के पक्ष में रहा है।
कनिमोझी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी तमिल भाषा और संस्कृति पूरी मजबूती के साथ सुरक्षित रहेगी और कोई भी शक्ति इसे कमजोर नहीं कर सकती।





