भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात आज से 50 प्रतिशत तक के अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आ गया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले के बाद भारतीय वस्तुएं अमेरिकी बाजार में महंगी हो जाएंगी और निर्यातकों पर गहरा असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, झींगा, कपड़ा, आभूषण, मशीनरी और फर्नीचर जैसे क्षेत्रों में भारत का निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। अकेले कपड़ा उद्योग केंद्र तिरुपुर, नोएडा और सूरत में उत्पादन रुकने की स्थिति आ गई है। तिरुपुर के निर्यातकों ने आशंका जताई है कि करीब 1.5 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है और 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
आकलन के अनुसार, लगभग 47 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात इस अतिरिक्त शुल्क की चपेट में आएगा। उदाहरण के तौर पर, जहां पहले कार्पेट पर केवल 2.9% शुल्क लगता था, अब यह बढ़कर 52.9% हो गया है। इसी तरह झींगा निर्यात पर कुल शुल्क 60%, निटेड अपैरल पर 63.9%, और टेक्सटाइल मेड-अप्स पर 59% तक पहुंच गया है।
हालांकि, फार्मा, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों को इस शुल्क वृद्धि से बाहर रखा गया है। लेकिन इससे भारत के 30-35 अरब डॉलर के निर्यात पर सीधा खतरा है।
इधर भारत सरकार “वोकल फॉर लोकल” अभियान को मजबूत करते हुए घरेलू खपत और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि निर्यात पर निर्भरता कम की जा सके।





