नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि इसरो विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वे राष्ट्रीय सम्मेलन 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
नारायणन ने बताया कि आज देश में अंतरिक्ष के 55 अनुप्रयोग सक्रिय हैं, जिनमें टेलीविजन प्रसारण से लेकर मौसम पूर्वानुमान तक शामिल हैं। इन उपग्रहों ने हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि 50 वर्ष पूर्व भारत के पास उपग्रह तकनीक नहीं थी, लेकिन आज हम विश्व की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
उन्होंने प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 29 जनवरी 2025 को इसरो ने 100वां रॉकेट प्रक्षेपित किया। 2015-2025 के दौरान संगठन ने 2005-2015 की तुलना में लगभग दोगुने मिशन पूरे किए। नारायणन ने जून में लॉन्च हुए निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) सैटेलाइट को विश्व का सबसे महंगा उपग्रह बताते हुए गर्व जताया कि यह पूरी तरह इसरो द्वारा निर्मित और भारतीय रॉकेट से कक्षा में स्थापित किया गया।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने भी इस अवसर पर कहा कि सरकार द्वारा लागू सुधारों ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नवोन्मेषी और लचीला बनाया है। अब इसरो अत्याधुनिक तकनीक और डीप स्पेस मिशनों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, जबकि अनुप्रयोग और सेवाओं की जिम्मेदारी तेजी से विकसित हो रहे निजी क्षेत्र को सौंपी गई है।





