राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। उच्च सदन में विपक्ष ने इस संबंध में नोटिस दिया है। इस पर 70 से ज्यादा सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस दौरान विपक्ष को तृणमूल कांग्रेस का साथ नहीं मिला। ममता बनर्जी की पार्टी ने सदन वॉकआउट किया। इससे पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच टकराव सोमवार को चरम पर पहुंच गया था। इस टकराव के बाद विपक्ष ने धनखड़ को उनके कार्यकाल से हटाने के लिए एक अविश्वास प्रस्ताव लाने फैसला किया।इससे पहले अगस्त में भी विपक्षी गठबंधन को प्रस्ताव पेश करने के लिए नेताओं के हस्ताक्षर की जरूरत थी, लेकिन उस समय वे आगे नहीं बढ़े। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को एक मौका देने का फैसला किया, लेकिन सोमवार को उनके व्यवहार को देखते हुए विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी गठबंधन के कई सदस्य इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए साथ हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के रुख पर अब भी संशय नहीं बना हुआ है।
इस बीच बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि उनकी पार्टी राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के इंडिया ब्लॉक के कदम पर सोचसमझकर ही फैसला करेगी। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अविश्वास प्रस्ताव का बीजद समर्थन करेगी या नहीं? संसद के उच्च सदन में बीजद के सात सदस्य हैं। राज्यसभा में बीजद इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्षी दलों के पास सदन में प्रस्ताव को पारित कराने के लिए अपेक्षित संख्या नहीं है।
इससे पहले राज्यसभा में मंगलवार को सरकार और विपक्ष ने सोरोस, अदाणी समेत कई के मुद्दों पर जोरदार हंगामा किया। इसके बाद उच्च सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्यों ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर विदेशी संगठनों, लोगों के माध्यम से देश की सरकार, अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने अदाणी समूह से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए इस पर चर्चा कराने की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की।





