देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के शहरों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 20 मुख्य शहरों में वर्षाकाल के दौरान होने वाले भीषण जलभराव की समस्या से स्थाई निजात दिलाने के लिए ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ तैयार कर लिया गया है। सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अब अंतिम मंजूरी और बजट आवंटन के लिए शासन को भेज दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी आबादी को जलभराव के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान और आवाजाही की दिक्कतों से मुक्त करना है।
सिंचाई विभाग ने तैयार की विस्तृत कार्ययोजना (DPR)
प्रदेश में अनियोजित शहरीकरण के कारण जल निकासी एक बड़ी चुनौती बन गई थी, जिसे देखते हुए सिंचाई विभाग को ड्रेनेज प्लान बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
- 20 शहरों पर ध्यान: विभाग ने पहले चरण में राज्य के उन 20 प्रमुख शहरों को चिह्नित किया है, जहाँ मानसून के दौरान सड़कों पर जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा होती है।
- शासन को रिपोर्ट प्रेषित: इन शहरों के भौगोलिक स्वरूप और पानी के बहाव के रास्तों का अध्ययन करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट (DPR) शासन को सौंप दी गई है। अब संबंधित मंडलों के आयुक्त और जिलाधिकारियों (DM) की समीक्षा और संस्तुति के बाद बजट जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
बढ़ता शहरीकरण और बुनियादी सुविधाओं की चुनौती
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में शहरी क्षेत्रों का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन उस अनुपात में नागरिक सुविधाओं का विकास न होना एक गंभीर समस्या बन गया है।
- जल निकासी का अभाव: पुराने और संकरे ड्रेनेज सिस्टम के कारण थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें नदियों का रूप ले लेती हैं।
- नियोजित विकास: सरकार की प्राथमिकता अब ऐसे बुनियादी ढांचे को विकसित करना है जो भविष्य की शहरी आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली भारी बारिश को झेल सके।
सरकार की प्राथमिकता: आमजन को मिले राहत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुसार, वर्षाकाल में आम जनता को होने वाली परेशानियों को कम करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।
- बजट की उपलब्धता: शासन अब इन 20 शहरों के ड्रेनेज प्लान के लिए चरणबद्ध तरीके से बजट उपलब्ध कराने की रणनीति बना रहा है।
- स्थाई समाधान: इस ड्रेनेज प्लान के तहत बड़े नालों का निर्माण, पुराने नालों का सुदृढ़ीकरण और पानी की निकासी के प्राकृतिक स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जाएगा ताकि शहरों के भीतर पानी जमा न हो सके।





