Top 5 This Week

Related Posts

ईरान में सत्ता संघर्ष तेज: क्या होने वाला है तख्तापलट? सरकारी कामकाज पर IRGC ने बढ़ाई पकड़; अमेरिकी थिंक टैंक का बड़ा दावा

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम की समयसीमा समाप्त होने से ठीक पहले ईरान की सत्ता के गलियारों से बड़ी हलचल की खबरें आ रही हैं। वॉशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वार’ (ISW) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि तेहरान के शीर्ष नेतृत्व के भीतर कूटनीति और युद्ध को लेकर गहरे मतभेद उभर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) अब देश के नागरिक और सरकारी कामकाज में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, जिससे भविष्य में सत्ता परिवर्तन या तख्तापलट जैसी स्थितियों की आशंका जताई जा रही है।

नेतृत्व में दरार: कूटनीति बनाम सैन्य शक्ति

ISW के विश्लेषण के मुताबिक, ईरान की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में अमेरिका के साथ शांति वार्ता को लेकर दो फाड़ हो चुके हैं।

  • बाकर गलीबाफ का रुख: ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ फिलहाल कूटनीतिक समाधान और अमेरिका के साथ बातचीत के पक्ष में नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य के लिए वार्ता का रास्ता खुला रखना चाहिए।
  • अहमद वाहिदी का कड़ा स्टैंड: दूसरी ओर, IRGC के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी किसी भी प्रकार की बातचीत के सख्त खिलाफ हैं। वाहिदी का गुट अमेरिका को झुकने पर मजबूर करने के लिए सैन्य प्रतिरोध को ही एकमात्र विकल्प मान रहा है।

IRGC का बढ़ता प्रभाव और मोजतबा खामेनेई से नजदीकी

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा IRGC कमांडर अहमद वाहिदी की शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच को लेकर किया गया है।

  • सर्वोच्च नेता तक पहुंच: विश्लेषण के अनुसार, अहमद वाहिदी की पहुंच सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (आयतुल्लाह अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने वाले) तक है। इस नजदीकी के कारण वाहिदी का प्रभाव सरकारी फैसलों पर गलीबाफ जैसे नागरिक नेताओं से कहीं अधिक हो गया है।
  • निर्णय प्रक्रिया में बाधा: रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व के भीतर पहुंच का यह असंतुलन अमेरिका-ईरान वार्ता में सबसे बड़ी रुकावट बन रहा है। नागरिक अधिकारी जहाँ समझौते की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सैन्य नेतृत्व उन प्रयासों को विफल करने में जुटा है।

क्या ईरान में सैन्य शासन की ओर बढ़ रहे हैं कदम?

विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से IRGC ने देश के आंतरिक मामलों और रणनीतिक फैसलों में अपनी दखलंदाजी बढ़ाई है, वह एक ‘मूक तख्तापलट’ (Silent Coup) की ओर इशारा कर रहा है।

  1. संसाधनों पर नियंत्रण: देश के आर्थिक और रणनीतिक संसाधनों पर IRGC का पहले से ही काफी नियंत्रण है, जिसे अब प्रशासनिक स्तर पर भी बढ़ाया जा रहा है।
  2. संसद की अनदेखी: संसद अध्यक्ष के सुझावों को दरकिनार कर सैन्य कमांडरों की सलाह को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे निर्वाचित और नियुक्त प्रतिनिधियों के बीच तनाव चरम पर है।

युद्धविराम की समाप्ति और अनिश्चित भविष्य

अमेरिका के साथ युद्धविराम की अवधि खत्म होने वाली है और ईरान के भीतर चल रही यह खींचतान क्षेत्र में फिर से संघर्ष को जन्म दे सकती है। यदि कट्टरपंथी गुट यानी IRGC का वर्चस्व इसी तरह बढ़ता रहा, तो शांति वार्ता की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो सकती है। अमेरिकी थिंक टैंक का यह दावा वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़ी चेतावनी है, क्योंकि ईरान में सत्ता का संतुलन बिगड़ना पूरे मध्य पूर्व के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

Popular Articles