नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के 1980 की मतदाता सूची में नाम शामिल होने को लेकर राजनीतिक विवाद फिर चर्चा में है। भाजपा ने सवाल उठाया है कि यदि उस समय सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं, तो उनका नाम मतदाता सूची में किस आधार पर दर्ज किया गया था। यह मामला दिल्ली की अदालत के हालिया आदेश के बाद फिर सामने आया है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस वार्ता में कहा कि भारत में मतदान का अधिकार नागरिकों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में शामिल किया गया, जबकि भारतीय नागरिकता उन्हें 30 अप्रैल 1983 को मिली थी। भाजपा ने इस आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज किए जाने की परिस्थितियों की जांच की मांग की है।
कोर्ट के फैसले से फिर खुला मामला
मामले में राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने 21 सितंबर को मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले को दोबारा संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत के पास भेजते हुए दोनों पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार विस्तृत आदेश देने को कहा।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में शामिल हुआ था और इस प्रक्रिया में कथित तौर पर गलत या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। हालांकि, ये आरोप हैं और अदालत की ओर से अभी किसी तरह की दोषसिद्धि नहीं हुई है। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में आरोपों की जांच होनी है।
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस से जवाब मांगा है। वहीं, इस पूरे विवाद में अंतिम स्थिति अदालत की आगे की कार्यवाही और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।




