नई दिल्ली। देश में केंद्र सरकार की 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 तक इन परियोजनाओं की कुल लागत अनुमानित राशि से करीब 5.65 लाख करोड़ रुपये अधिक हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में कुल 1,981 बड़ी परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है। इन परियोजनाओं की प्रारंभिक लागत 37.12 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो अब बढ़कर 42.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है। अब तक इन परियोजनाओं पर लगभग 20.36 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि परिवहन, सड़क, रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं में सबसे अधिक लागत वृद्धि देखी गई है। बड़ी संख्या में परियोजनाएं तय समय सीमा से पीछे चल रही हैं, जिससे लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार भूमि अधिग्रहण में देरी, निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें, प्रशासनिक मंजूरियों में विलंब और तकनीकी बदलाव लागत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। कई परियोजनाओं में समयसीमा बार-बार बढ़ाने से भी खर्च लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 814 परियोजनाएं ऐसी हैं जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से कई परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं। मंत्रालय ने संबंधित विभागों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर समय और लागत दोनों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं की निगरानी और समन्वय व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में सरकारी वित्तीय बोझ और बढ़ सकता है।






