नई दिल्ली। मानव तस्करी और अपहरण के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की पुलिस को लापता व्यक्ति की सूचना मिलने पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था उम्र और लिंग के आधार पर अलग-अलग नहीं होगी। यानी बच्चे, महिला या पुरुष—हर लापता व्यक्ति के मामले में पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लापता व्यक्ति की तलाश में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी होने से व्यक्ति के मानव तस्करी, अपहरण या अन्य अपराधों का शिकार होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पुलिस को शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच के नाम पर एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
अदालत ने मानव तस्करी से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया। यदि जांच के दौरान किसी मामले में मानव तस्करी की आशंका सामने आती है तो उसे संबंधित विशेष इकाई को जल्द सौंपने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लापता लोगों और मानव तस्करी के मामलों से निपटने के लिए प्रभावी और व्यावहारिक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने को कहा है। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक लापता व्यक्ति का पता नहीं चल जाता, मामले को केवल कागजों पर लंबित न रखा जाए, बल्कि उसकी तलाश के लिए वास्तविक प्रयास जारी रहने चाहिए।
अदालत का यह निर्देश देश में लापता लोगों की तलाश और मानव तस्करी पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





