हल्द्वानी/रामनगर। टैक्स बार एसोसिएशन में नई कार्यकारिणी की ताजपोशी हो गई है। रामनगर के एक निजी रिसॉर्ट में सोमवार को हुई द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया में सभी पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। अधिवक्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए मौ. फिरोज अंसारी को अध्यक्ष और मनु अग्रवाल को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी। नई टीम ने साफ कर दिया कि बार की मजबूती के साथ अधिवक्ताओं के अधिकारों और आमजन से जुड़े कानूनी मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा।
निर्वाचन में मौ. फिरोज अंसारी अध्यक्ष, मनु अग्रवाल महासचिव, गुलरेज रजा उपाध्यक्ष, जीशान मलिक उपसचिव, मनोज सिंह बिष्ट कोषाध्यक्ष, राकेश कुमार राही पुस्तकालयाध्यक्ष और विशाल रस्तोगी प्रेस प्रवक्ता चुने गए। वहीं पूरन चंद्र पांडेय को कार्यकारिणी सदस्य की जिम्मेदारी दी गई।
‘सभी को साथ लेकर बार को नई ऊंचाई देंगे’
नवनिर्वाचित अध्यक्ष मौ. फिरोज अंसारी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता सभी अधिवक्ताओं को साथ लेकर संगठन को और मजबूत करना होगी। अधिवक्ताओं के हितों के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने संगठन की ओर से अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पैरवी का भरोसा दिलाया।
महासचिव मनु अग्रवाल ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव और युवा अधिवक्ताओं की ऊर्जा को साथ लेकर बार को नई दिशा देने का प्रयास होगा। आमजन को कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के लिए निःशुल्क विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।
सामाजिक मुद्दों पर भी मुखर होगी बार
कार्यकारिणी सदस्य पूरन चंद्र पांडेय ने कहा कि सामाजिक समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। जनता से जुड़े मुद्दों को समय-समय पर प्रमुखता से उठाकर उनके समाधान के लिए संबंधित स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
निर्वाचन के बाद अधिवक्ताओं ने नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर जोरदार स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। नवनिर्वाचित टीम ने संगठन की एकता और अधिवक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया।
इस दौरान पूर्व सचिव गौरव गोला, नावेद अख्तर सैफी, मनोज अग्रवाल, लईक अहमद, फैजूल हक, संजीव अग्रवाल, सुमित चंद्रवंशी, शोभित अग्रवाल और आशीष दानी समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
निर्विरोध चुनाव ने दिया एकजुटता का संदेश
टैक्स बार एसोसिएशन के चुनाव में किसी भी पद पर मुकाबला नहीं हुआ। सभी पदाधिकारियों का निर्विरोध चुना जाना संगठन के भीतर आपसी सहमति और एकजुटता का संदेश माना जा रहा है। नई कार्यकारिणी के सामने अब इस भरोसे को काम में बदलने और अधिवक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी।





