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‘विपक्ष का विरोध केवल छलावा, परिसीमन पर भ्रम फैला रही कांग्रेस’: मुख्यमंत्री धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष को घेरा

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर तीखा प्रहार किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परिसीमन को लेकर विपक्ष द्वारा व्यक्त की जा रही तमाम आशंकाएं पूरी तरह तथ्यहीन और बेबुनियाद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक कदम को बाधित करने के लिए तकनीकी आपत्तियों और प्रक्रियात्मक बहानों का सहारा लिया है।

तकनीकी बाधाएं खड़ी करने का आरोप

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है, तब विपक्ष इसे राजनीतिक विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहा है।

  • भ्रम की राजनीति: मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की आदत हमेशा से भ्रम फैलाने की रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर झूठे तर्क गढ़कर देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।
  • प्रक्रिया में रुकावट: सीएम के अनुसार, विपक्ष ने जानबूझकर ऐसे बहाने खोजे जिससे इस अधिनियम की राह में रोड़े अटकाए जा सकें, लेकिन सरकार नारी शक्ति को उनका अधिकार देने के लिए संकल्पबद्ध है।

परिसीमन: एक संवैधानिक दायित्व

विपक्ष द्वारा परिसीमन (Delimitation) को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने इसके महत्व को रेखांकित किया।

  • न्यायसंगत प्रतिनिधित्व: उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन कोई राजनीतिक हथियार नहीं, बल्कि एक संवैधानिक दायित्व है। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप समाज के हर वर्ग को संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
  • राज्यों के हितों की सुरक्षा: मुख्यमंत्री ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि इस प्रक्रिया से कुछ राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों के लिए समान रूप से सीटों की वृद्धि का प्रावधान है।

दक्षिण भारत के हितों पर टिप्पणी

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं पर बोलते हुए कहा कि विपक्ष का यह दावा पूरी तरह गलत है कि परिसीमन से दक्षिण भारत के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

  • संतुलित विकास: उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार की योजनाएं और संवैधानिक प्रक्रियाएं इस तरह तैयार की गई हैं कि किसी भी क्षेत्र या राज्य के साथ अन्याय न हो। दक्षिण भारत के राज्यों के अधिकार और उनकी राजनैतिक भागीदारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

नारी शक्ति का सम्मान सर्वोपरि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंत में दोहराया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं है, बल्कि यह देश की आधी आबादी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे विपक्ष के नकारात्मक प्रचार में न आएं और देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के इस महाभियान का समर्थन करें। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि राज्य और केंद्र सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है।

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